संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान राज्यसभा सांसद सुशील कुमार मोदी ने आज सदन में बड़ा सवाल उठा दिया। सुशील कुमार मोदी ने सदन में सवाल उठाया है कि जिस तरह से सांसद, विधायक और आईएएस, आईपीएस और अन्य अधिकारी हर साल अपनी संपत्ति का ब्योरा सार्वजनिक करते है उसी तरह जज भी अपनी संपत्ति का ब्यौरा दें। इसके साथ ही उन्होंने इसपर कानून बनाने की मांग की है।
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“जज के लिए भी कानून बनाए भारत सरकार”
सुशील मोदी ने कहा कि जब कोई भी व्यक्ति एमपी-एमएलए का चुनाव लड़ने के लिए खड़ा होता है तो उसे अपनी संपत्ति की जानकारी देनी पड़ती है एमपी बनने के बाद भी संपत्ति का ब्योरा देना होता है। प्रधानमंत्री से लेकर कैबिनेट मंत्री को प्रति वर्ष अपनी संपत्ति का ब्योरा देना होता है। लेकिन सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के जजों के लिए ऐसी कोई व्यवस्था नही है। जजों के लिए भई ऐसा कानून बने जिससे उन्हें अपनी संपत्ति का ब्यौरा देना पड़े। सुशील मोदी ने सदन को बताया कि सुप्रीम कोर्ट की फुल बेंच ने 7 मई 1997 को यह निर्णय लिया था कि सभी जज अपनी संपत्ति की जानकारी देंगे लेकिन बाद में सुप्रीम कोर्ट के बेंच ने खुद से वापस ले लिया। उन्होंने आगे कहा कि भारत सरकार वर्तमान कानून में संशोधन करे या नया कानून बनाए, इसके लिए नैकेनिजम विकसित करे। ताकि एमपी,एमएलए की तरह जज को भी अपनी संपत्ति का ब्यौरा देना पड़े।



















